-मॉडर्न टेक्नीक से ही बदलेगी कानपुर महानगर की तस्वीर
कानपुर। एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल ग्रेजुएट सिविल इंजीनियर्स (एपीजीसीई) ने भारत रत्न एवं महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की स्मृति में इंजीनियर्स डे की पूर्व संध्या पर एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर के विकास और उसमें इंजीनियरों की भूमिका पर चर्चा की गई। एडीसीपी एलआईयू महेश कुमार कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम में इंजीनियर वक्ताओं ने कहा कि किसी भी शहर के विकास में सिविल इंजीनियरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सड़क, पुल, भवन, जल निकासी, यातायात व्यवस्था और अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण में इंजीनियर तकनीकी विशेषज्ञता के साथ शहर के भविष्य की दिशा भी तय करते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. एफयू रहमान ने ‘कानपुर 2047’ पर व्याख्यान दिया। उन्होंने एक प्रेंसटेशन के माध्यम से बताया कि 2047 का कानपुर विकास के मामले में कैसा हो।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर जय राम कुमार ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बदलती तकनीक, आधुनिक निर्माण प्रणाली और सुरक्षित और विकास की जरूरत पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरों के सामने यातायात, जल निकासी, प्रदूषण और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में इंजीनियरों को तकनीकी ज्ञान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता देनी होगी।
संस्था के सचिव इंजीनियर रजत कुमार खरे ने कानपुर के समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहर को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए सरकारी विभागों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिकों के बीच समन्वय जरूरी है। डॉ खरे ने सुगम, सुरक्षित व गतिमान कानपुर विषय पर अपने विचार प्रकट करते हुये महानगर की यातायात व्यवस्था को सुधारे जाने पर मुख्य रुप से फोकस किया। कार्यक्रम में एपीजीसीई कानपुर चौप्टर के अध्यक्ष मुकेश देव, सचिव रजत कुमार खरे, कोषाध्यक्ष आनंद सिंह समेत बड़ी संख्या में सिविल इंजीनियर, सेवानिवृत्त इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।महासचिव नरेश खंडेलवाल ने विशिष्ठ अतिथि महेश कुमार का परिचय देने के अलावा सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।
























