यह निर्णय छोटे उधमियों के नजरिए से अत्यंत निराश करने वाला – सुशील शर्मा
कानपुर। उत्तर प्रदेश मर्चेंट चैंबर के इंडस्ट्री कमेटी के चेयरमैन सुशील शर्मा ने कहा है कि ईपीएफ अंशदान के लिये वेतन सीमा 25 हजार किया जाना अनुचित है। यह निर्णय छोटे उधमियों के नजरिए से अत्यंत निराश करने वाला है। इससे ऐसे छोटे नियोक्ताओं पर जो कार्यशील पूंजी के लिए हमेशा संघर्षरत रहते हैं उनपर अतिरिक्त आर्थिक भार पडेगा तथा अनुपालन संबधी परेशानियों से जूझना पडेगा वो अलग से। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो हम विगत कई वर्षाे से यह मांग करते चले आ रहे हैं कि जिन छोटी ईकाईयों में जहां 50 से कम कर्मचारी कार्य करते हैं उन्हे श्रम कानूनों तथा अन्य इस तरह के कानून के अनुपालन से मुक्त कर देना चाहिए जिससे ऐसे छोटे उधोग भयमुक्त एवं उन्मुक्त होकर कार्य कर सकें किंतु उनपर ऐसे कानून थोपकर एक प्रकार से उनका उत्पीड़न ही होगा। श्री शर्मा ने कहा कि यहां ये उल्लेख करना जरूरी है कि ऐसी छोटी ईकाईयों में काम करने वाले अधिकतर मैकेनिक या लेबर स्थाई प्रवृति के नही होते तथा जल्दी जल्दी अन्य ईकाईयों में चले जाते हैं, ऐसे कर्मचारी अपने वेतन से किसी तरह की कटौती नही चाहते, ऐसी परिस्थिति में इनका अंशदान भी नियोक्ताओं को ही जमा करना पडता है। ऐसे में नियोक्ताओं पर दोहरी मार पडती है।
























