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औद्योगिक नगरी कानपुर की संस्कृति और तासीर का जीवंत दस्तावेज है ‘कनपुरिया अड्डे’

​कानपुर। शहर की अनूठी रंगबाजी, जिंदादिली और अखाड़ेदारी के किस्सों को समेटे पुस्तक ‘कनपुरिया अड्डे’ का भव्य लोकार्पण एक गरिमामयी समारोह में हुआ। यूनाइटेड पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागार में कनपुरिया भाषा शैली में हुये कार्यक्रम में प्रदेश की औद्योगिक राजधानी की सांस्कृतिक विरासत की खुशबू फिजाओं में तैरी। सम्मानीय वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा की लिखित पुस्तक ‘कनपुरिया अड्डे’ के लोकार्पण का अवसर अड्डेबाजी के संस्मरणों को ताजा करने का एक बेहतरीन मौका साबित हुआ। विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों के अलावा समाजसेवी, अधिवक्ता, पत्रकार, चिकित्सक और शिक्षाविदों ने शुक्रवार की शाम एक ही ‘अड्डे’ पर ‘बाजी’ करके बीते हुये दिनों की सुनहरी यादों के साथ ठहाके लगाये। अड्डेबाजों ने वही पुराने ठेठ कनपुरिया भाषाई अंदाज में बीते हुये दिनों को याद किया। साथ ही अड्डेबाजी की इतिश्री होने के लिये मोबाइल फोन कल्चर की बढ़ती महामारी को दोषी ठहराया। कानपुर से पत्रकारिता के सफर को प्रारंभ करने वाले वरिष्ठ पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी ने कहा कि कानपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक मिजाज है। कनपुरिया अड्डे यहां के जनजीवन, भाषा के अनूठे रंग और शहर की ऐतिहासिक तासीर को बखूबी बयां करती है। ​समारोह की अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ पत्रकार सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि अड्डों से केवल गपशप नहीं निकलती, बल्कि वहीं से विचार, साहित्य और सामाजिक सरोकार जन्म लेते हैं।​ स्वागत एवं संचालन ​कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम संयोजक अधिवक्ता रोहित अवस्थी ने मुख्य अतिथि एवं सभी मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण व स्मृति चिह्न भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। समारोह का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन वरिष्ठ पत्रकार मौली सेठ ने किया।

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