- श्री रामलीला सोसाइटी परेड, कानपुर का 150वां सुस्वर्णिम वर्ष
कानपुर। श्रीरामलीला सोसाइटी परेड का इस साल 150वां सुस्वर्णिम वर्ष है। आयोजनों की श्रृंखला का शुभारंभ मंगलवार को मर्चेंट चैंबर प्रेक्षागार में युग तुलसी महाराज श्रीराम किंकर जी की सुयोग्य शिष्या परम पूज्य दीदी मां मंदाकिनी के मानस प्रचवन के साथ हुआ। राम कथा के पहले दिन परम पूज्य दीदी मां मंदाकिनी ने कहा कि नई पीढ़ी को आयु वर्ग से ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ में बांट दिया गया। उनके मन में जिज्ञासाएं हैं। उनका उत्तर रामकथा में मिलेगा। रामकथा की वैज्ञानिकता उनके मन को शांत करेगी। बच्चों को धन, वैभव के साथ सुसंस्कार दें। अधिक अर्थ लोभ राक्षसत्व की ओर ले जाता है। अर्थ लोभ में पुत्र पिता की हत्या कर देता है। जेन जी और अल्फा को राम कथा सुनने के लिए लाएं। श्रीरामलीला सोसाइटी का स्वर्ण जयंती वर्ष होने की वजह से रामचरित मानस के दृष्टांतों के जरिये स्वर्ण की व्याख्या की गई। हनुमान जी की कथा के माध्यम से भूख का विश्लेषण किया गया। उन्होंने कहा कि देश की 60-65 प्रतिशत आबादी युवा है। उनका मार्गदर्शन आवश्यक है। देश से लेकर हार्वर्ड तक जेन जी के मन में एक जैसी जिज्ञासाएं हैं। यह बुद्धिजीवियों का युग है। उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से समझाएं। शास्त्र और रामचरित मानस की चौपाइयां मानव जीवन के रहस्यों को उद्घाटित करती हैं। उन्होंने बताया कि हनुमान अंश देखने के बाद एक जेन जी के मन में प्रश्न आया कि क्या नीम करौरी महाराज हनुमान अंश हैं? मां जवाब नहीं दे पाई तो उनके पास ले आई। बच्चे को बताया कि सभी में हनुमान और ईश्वर अंश है। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस जीवन का सत्य है। इससे मिले संस्कार विभिन्न प्रकार की भूख को शांत करते हैं। कानपुर के जघन्य कांड का जिक्र किया और कहा कि भूख से जो महत्वाकांक्षा के वन में भटकता है वह रावण बन जाता है। नई पीढ़ी जो गलत कृत्य करती है तो उसके लिए सभी दोषी हैं। पुत्र पिता की हत्या करे यही रावणत्व है। रामकथा कार्यक्रम में राजीव गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, पवन गर्ग, आलोक अग्रवाल, राजीव अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
बाइट- श्री आलोक अग्रवाल





























