आईएमए ने नेत्रदान करने वालों के परिजनों को किया सम्मानित
कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने “विश्व नेत्रदान दिवस” के अवसर एक कार्यक्रम का आयोजन कर नेत्रदान करने वालों के परिजनों और इस पुनित कार्य में सराहनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा इस महान कार्य में योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं उनके परिजनों का सम्मान करना था। आईएमए ने नेत्रदान करने वाले महानुभावों एवं उनके परिजनों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नेत्रदान एक ऐसा महादान है, जिससे मृत्यु के उपरांत भी किसी व्यक्ति के जीवन में प्रकाश लाया जा सकता है। एक नेत्रदाता दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि प्रदान करने में सहायक बन सकता है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बताया कि नेत्रदान मानवता की सबसे महान सेवाओं में से एक है। भारत में लगभग 10 से 12 लाख लोग कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित हैं तथा प्रतिवर्ष लगभग 25,000 से 30,000 नए मरीज इस श्रेणी में जुड़ जाते हैं।
इसके मुकाबले नेत्रदान की संख्या अभी भी आवश्यकता से काफी कम है। डॉ. मेहरोत्रा ने कहा कि नेत्रदान मृत्यु के उपरांत भी समाज की सेवा का एक अनमोल अवसर है तथा प्रत्येक नागरिक को अपने परिवार के साथ नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोगों के जीवन में प्रकाश लाया जा सके।
डॉ शालिनी मोहन आईएमए सचिव ने कार्यक्रम का संचालन और सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
















