- कानपुर कमिश्नरेट से सात वरिष्ठ पुलिस अफसरों के तबादले
- याद किया जायेगा डीसीपी श्रवण, रवींद्र, रामटेके का कार्यकाल
- ड्रोन की मदद से अपराधी दबोचने का प्रयोग पहली बार हुआ
- कानपुर को मिले दो नये आईपीएस और तीन पीपीएस अधिकारी
कानपुर। शनिवार की देर शाम शासन ने कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने सात वरिष्ठ अधिकारियांे का तबादला कर दिया। कानपुर से पांच आईपीएस और पीपीएस दंपति समेत सात पुलिस अफसरों का एक साथ ट्रांसफर हुआ। इधर, दो आईपीएस और तीन पीपीएस अफसरों को कानपुर स्थानांतरित किया गया है। महिला आईपीएस अरीबा नोमान और अभय नाथ त्रिपाठी के साथ ही तीन पीपीएस अफसरों को कानपुर की कानून-व्सवस्था संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईपीएस कपिलदेव सिंह, एडीसीपी लाइन – पुलिस अधीक्षिक, यातायात मुख्यालय लखनऊ और आईपीएस राजेश कुमार पांडेय, एडीसीपी वेस्ट – पुलिस उपायुक्त, पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी भेजे गये हैं। कानपुर को तबादले पर गये यह कर्मठ पुलिस अधिकारी हमेशा याद रहेंगे और इनकी कमी अखरेगी।
तत्कालीन पुलिस आयुक्त अखिल कुमार के दिशा निर्देशन में डीसीपी श्रवण कुमार सिंह ने कानपुर में माफियाओं के खिलाफ ऑपरेशन महाकाल अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। अपराधियों को छठी का दूध याद दिला देने के लिये विख्यात आईपीएस श्रवण कुमार सिंह ने कानपुर के माफियाओं का डाटा तैयार करने के साथ ही उनके खिलाफ हार्ड एक्शन लिया। श्रवण कुमार सिंह ने प्रेस क्लब का पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित को साथियों समेत व अधिवक्ता अखिलेश दुबे समेत कई अन्य वसूलीबाज व माफियाओं को जेल भेजने में अहम भूमिका निभाई। अपनी खास कार्यशैली के लिये विशेष पहचान रखने वाले तेज तर्रार आईपीएस श्रवण कुमार ने चाहे दागी अधिवक्ता हों या वसूलीबाज पत्रकार या फिर सफेदपोश की आड़ में छिपे अपराधी सबकी कुंडली तैयार की और एक-एक को जेल भेजा। बड़ी संख्या में कुख्यात अपराधी दबोचे और पुलिस पर प्राणघातक हमला करने वाले गुंडांे को गोली का जबाव गोली से दिया गया। डीसीपी क्राइम की कुर्सी संभालने के बाद साइबर अपराधियों पर सबसे बड़ा एक्शन हुआ, ड्रोन की मदद से पहली साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसा गया। चाहे जीएसटी इनपुट क्रडिट हड़पने से जुड़ा फ्रॉड का मामला हो या फिर गेमिंग के जरिए साइबर फ्रॉड एक के बाद एक साइबर ठगों के सिंडीकेट के खिलाफ एक्शन हुआ।
आईपीएस रवींद्र कुमार ने अपराधियों की उस धारणा को ध्यवस्त कर दिया कि शहर का दक्षिण पार्ट क्रिमनल्स के लिये सेफ एरिया है। साउथ जोन में ताबड़तोड कार्रवाई करके अपराधियों के नाक में नकेल कसी गई, अपराधी भययुक्त और जनता भयमुक्त हुई, दक्षिण जोन में कानून का साम्राज्य कायम हुआ। इसके बाद यातायात की जिम्मेदारी मिलने पर सुगम व सुलभ यातायात के लिये सफल योजनायें बनाई गई, बिगड़ा यातायात सुधरा और
जनमानस को सड़कों पर राहत मिली। सड़क दुर्घटनायें रोकने की दिशा में किये गये प्रयास सार्थक और उद्देश्यपूर्ण रहे।
जेन जी के फेवरेट आईपीएस सुमित सुधाकर रामटेके ने कानपुर में मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ ‘ऑपरेशन व्हाइट पाउडर’ चलाकर तस्करों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया। इसमें शामिल पुलिस वालों को भी नहीं छोड़ा और उनके खिलाफ भी विभागीय एक्शन लिया। एसीपी से कानपुर में ही एडीसीपी पदोन्नत हुये आईपीएस सुमित सुधाकर रामटेके ने कम समय में कानपुर में 50 से ज्यादा बड़े मादक पदार्थ तस्करों को अरेस्ट करके जेल भेजा। ड्रोन की मदद से ड्रग स्मगलर व साइबर क्रिमनल्स के खिलाफ एक्शन का प्रयोग आईपीएस रामटेके के ही दिमाग की उपज मानी जाती है।
पीपीएस दंपति महेश-अर्चना सिंह
कानपुर में तैनात पीपीएस अफसर महेश कुमार और उनकी पत्नी अर्चना सिंह का एक साथ दूसरे जिले में ट्रांसफर कर दिया गया है। बिजनौर से कानपुर में एसीपी के पद तबादला होने के बाद पीपीएस दंपति महेश कुमार-अर्चना सिंह का कार्यकाल भी प्रशंसनीय रहा। महेश कुमार को हापुड़, जबकि उनकी पत्नी को गौतमबुद्ध नगर में तैनाती की गई है। दोनों ही अफसरांे ने अपने सरल स्वभाव और मिलनसार होने के चलते कानपुर में लोगों के बीच कम समय में गहरी पैठ बनाई है।
तीन पीपीएस अफसर कानपुर आएंगे
कानपुर में तीन पीपीएस अफसर की तैनाती की गई है। जिनमे एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ में अपर पुलिस अधीक्षक इंद्रप्रभा सिंह, बिजनौर में एएसपी ग्रामीण प्रकाश कुमार और आगरा में तैनात पूनम सिरोही का कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में ट्रांसफर किया गया है। इटावा एसपी अभय नाथ त्रिपाठी और झांसी में एएसपी के पद पर तैनात आईपीएस अरीबा नोमान का कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में ट्रांसफर किया गया है।
























