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बैडमिंटन कोर्ट पर गुजरती है 74 वर्षीय राजीव एडगर जी की हर शाम


कानपुर। कहने को तो बैडमिंटन एक ऐसा स्पोर्ट्स है, जो देखने में बड़ा आसान सा लगता है लेकिन सच्चाई इसके उलट है। रैकेट से शटलकॉक का कांटेक्ट सिर का पसीना एड़ी तक ले आता है। मॉडर्न मेडिकल साइंस ने बैडमिंटन को वेस्ट कार्डियो स्पोटर््स माना है और जब कोर्ट पर 74 वर्षीय शटलर राजीव एडगर टॉस, ड्राप व स्मैश की झडी लगाते हैं तो बात हर किसी के लिये प्रेरणा बन जाती है। खासतौर पर जेन ज़ी कही जाने वाली युवा पीढ़ी के लिये। एडगर सर न थकते हैं, न हार से विचलित हैं और न ही खेल के प्रति अपना आत्मविश्वास खोते हैं। राजीव एडगर सर की प्रेरणादायक फिटनेस थ्योरी पर ‘डॉल्फिन न्यूज’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट….

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